Thursday, May 8, 2014

बजती खतरे की घंटी

जाग उठी  है
राजनीतिक लोक तंत्र माफिया |
भ्रष्टचारियों की
हो रही जय जयकार यहाँ|
ढकोशले लोकतंत्र में बैठे नेता 
एक से बढ़कर एक लुटेरा  सरदार यहाँ|
खामोश खाड़ी
जनता के आँखों में| 
सरे आम धुल झोक रहे
बेईमान यहाँ|
हे !
"भारत" के "नव युवा"
जागो निद्रा से|
बज रही देश में
खतरे की घंटी |
चेतना लाओ उदर में
करो बुलंद आवाज | 
बेईमान-भ्रष्टाचारियों को करें बेनकाब 
रचो देश का स्वर्णिम इतिहास |

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