Saturday, June 16, 2012

मनकी पीड़ा



कैंकें बतुं आपु पीड़ा
समझण कोई नि चान,
सब आपुण काम में मस्त हैरिन
कैंकें बतुं आपु पीड़ा।
म्यर पहड्क ठंडी हवा
ठंडो मिठो पाणी
याद उणे पहाड्की
कैंकें बतुं आपु पीड़ा।
गौं  बाखेय में जी
सब दगडी मिल-झूली
अपु हाल सुनुछी
याद उने घरकी
कैकें बतुं आपु पीड़ा ।
आज आपुण घर जानु
मित्र ना बंधू ना
वार ना पार ना
सबुले छोड़ी पहाड़
कैंकें बतुं आपु पीड़ा ।
हे देवा !
म्यर पहाड़ कस रूप हैगो
तू ही सबुकें सुनणी
तू ही य पहाड़ कें सँवार सकछे
और कैंकें बतुं आपु पीड़ा
कैंकें बतुं आपु पीड़ा ।

Tuesday, June 12, 2012

आखिर कब तक


Monday, June 4, 2012

गेवाड़ घाटी का दर्द कोई क्यूँ नही समझता .........



गांव की याद में


यो पहाड़ म्यर पहाड़ , रंगीलो रंगीलो पहाड़ ,

खेती पाती डाई बोटी , लगूं छो के भाल पहाड़,

पाणी याँको ठंडो मिठो,
 सुरीली हवे बहार ,
 
बारो मास रंगरंगीलो,
 छाजी रोछो म्यर पहाड़,

सीधो साधो भलो मनखी, 
गों बाखेई में बसी छन, 

मेहणों मेंहन तीज त्यौहार,
कौतिकों की रन मन,

म्यर पहाड़ जन्म भूमि,
नौरंगी गेवाड़ भूमि , 


भूमियाँ की छाया यां छू, कत्युरों की कर्म भूमि,

रामगंगा को मिठो पाणी, 
डाव बट्यों की छायाणी,

गध्यारा यो रौल मौल, 
कुखुड सिटौल करौल, 

के भला यूँ स्यरा म्यरा, 
याद मिकैं ओनी .

"यौ त हद्द है गेई "

आजकलै जमान में रौन मुश्किल है गो ,
खाण हराम हैगो, जिण हराम है गो,
आदिम-आदिम खांह बटिगो,
यौ त हद्द है  गेई  ।।


सरकारि स्कुलै मास्टर, चाहा पीण में 
गप्प मारण में रोंणी,
नान-तिन, पब्लिक स्कूलों में पढ़नी,
अखबार में रोज बलात्कार, खून,
एक्सीडेंटल केस छापनी,
कानून आखों में पट्टी बाँधी छू,
यौ लै हद्द है गेई।।


नेता कुर्शी में बैठ बे, झक मारनी,
आपु घर भरणी
बेरोजगारों कें दूध में जहर मिलाई जस बचन कौणी,
घोटाला, घुस, बलात्कार जस केस करबे 
गरीब लोगों कें फसोंनी 
यौ त हद्द है गेई।।


यौ देश  जैहैं जगत गुरु कौनी, 
भ्रष्टाचार फ़ैलण शिष्टाचार घटण,
धर्म संस्कृति, व सभ्यता कें रोज- रोज खून हौण,
यौ लै हद्द है गेई।।

Sunday, June 3, 2012

*** च्यला मकें भूल गेछे***


म्यर च्यला
 किले मकें भूल गेछे तू
च्यला जब तू नान्ने छिये
तेरी इच्छा पूरी कर
जे त्वील कौय से कर
च्यला पली बटी
इजा  बौज्यू सेवा करछिया
अब सेवा हराय
च्यल ब्वारी दुःख दिणी
कुनेयी ' घोड़ी दिल्ली जाएगी"
ब्या बाद में हूणों
दिल्ली लिजाण बात पीली हूनी
इजा बौज्यू कें दुःख दि बेर
आपुण पहाड़ कें छोड़ बेर
तुम परदेश बसी गेछा
च्यला ख़ुशी रया
खूब दैणी द्वार है जो
च्यला तुमारी ख़ुशी में
हमरी ख़ुशी बसी छू
च्याल एक बात जरुर कुँल
जबले हमरी याद आली
हम कें ले भेंट जये
हम कें ले भूल लागौल
म्यर च्यला
 किले मकें भूल गेछे तू
भास्कर जोशी

Thursday, May 24, 2012

**माँ की आस**

च्यला कब आले तू
तिकें मेरी  याद नि ओनी
डाई-बोटी-घर-घरों 
स्यरा-क्यारा बाट-घ्वेटू 
याद तिकें नि ओनी 
घर बार छोड़ त्वील
कुड़ी बाड़ी छोड़ त्वील
हिसाव-किल्मौड़ -काँफो-करोंज
तिकें याद नि ओनी
इजा-बौज्यू याद नि ओनी
पाली-पोशी तिकणी
लिखाय-पढाई तिकणी
सोचूं च्यला आलै तू
मी त्यर बाट देखुल
च्यला कब आले तू,
तिकें मेरी  याद नि ओनी
{पं. भास्कर जोशी }

गेवाड़ घाटी